डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने कहा है- जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है । वह उन्नत नहीं हो सकता । सचमुच किसी भी राष्ट्र की भाषा एवं साहित्य के अध्ययन के आधार पर वहाँ की सभ्यता एवं संस्कृति के विकास का सहज ही आकलन किया जा सकता है. क्योंकि साहित्य में मानवीय समाज के सुख-दुख आशा-निराशा साहस-भय और उत्थान-पतन का स्पष्ट चित्रण रहता है ।